#कृष्ण_जी का भी जन्म-मरण समाप्त नहीं है। यह अविनाशी नहीं है।
अध्याय 18 श्लोक 62 में गीता बोलने वाले ने कहा है कि हे भारत! तू सर्वभाव से उस
परमेश्वर की शरण में जा। उस परमेश्वर की कृपा से ही तू #सनातन परम धाम को तथा
परम शांति को प्राप्त होगा।
परमेश्वर #कबीर जी के मुख कमल से ये वचन सुनकर परमात्मा के लिए भटक रही
आत्मा को नई रोशनी मिली। सत्संग के उपरांत मीराबाई जी ने प्रश्न किया कि हे महात्मा जी!
आपकी आज्ञा हो तो शंका का समाधान करवाऊँ। कबीर जी ने कहा कि प्रश्न करो बहन जी!
प्रश्न :- हे महात्मा जी! आज तक मैंने किसी से नहीं सुना कि श्री कृष्ण जी से ऊपर
भी कोई #परमात्मा है। आज आपके मुख से सुनकर मैं दोराहे पर खड़ी हो गई हूँ। मैं मानती
हूँ कि संत झूठ नहीं बोलते। परमेश्वर कबीर जी ने कहा कि आपके धार्मिक अज्ञानी गुरूओं
का दोष है जिन्हें स्वयं ज्ञान नहीं कि आपके सद्ग्रन्थ क्या ज्ञान बताते हैं? देवी पुराण के
तीसरे स्कंद में श्री #विष्णु जी स्वयं स्वीकारते हैं कि मैं (विष्णु), ब्रह्मा तथा #शंकर #नाशवान हैं।
हमारा आविर्भाव (जन्म) तथा तिरोभाव (मृत्यु) होता रहता है।
#मीराबाई बोली कि हे महाराज जी! भगवान श्री कृष्ण मुझे साक्षात दर्शन देते हैं।
मैं उनसे संवाद करती हूँ। कबीर जी ने कहा कि हे मीराबाई जी! आप एक काम करो। भगवान
श्री कृष्ण जी से ही पूछ लेना कि आपसे ऊपर भी कोई मालिक है। वे देवता हैं,
कभी झूठ नहीं बोलेंगे। मीराबाई को लगा कि वह पागल हो जाएगी यदि कृष्ण जी से भी ऊपर कोई
परमात्मा है तो। रात्रि में मीरा जी ने भगवान श्री कृष्ण जी का आह्वान किया। त्रिलोकी नाथ प्रकट हुए। मीरा ने अपनी शंका-समाधान के लिए निवेदन किया कि हे प्रभु! क्या आपसे
ऊपर भी कोई परमात्मा है? एक संत ने सत्संग में बताया है। श्री कृष्ण जी ने कहा कि मीरा!
परमात्मा तो है, परंतु वह किसी को दर्शन नहीं देता। हमने बहुत समाधि व साधना करके
देख ली है। मीराबाई जी ने सत्संग में परमात्मा कबीर जी से यह भी सुना था कि उस पूर्ण
परमात्मा को मैं प्रत्यक्ष दिखाऊँगा। सत्य साधना करके उसके पास सतलोक में भेज दूँगा।
मीराबाई ने श्री कृष्ण जी से फिर प्रश्न किया कि क्या आप जीव का जन्म-मरण समाप्त कर
सकते हो? श्री कृष्ण जी ने कहा कि असंभव। कबीर जी ने कहा था कि मेरे पास ऐसा भक्ति
मंत्रा है जिससे जन्म-मरण सदा के लिए समाप्त हो जाता है। वह परमधाम प्राप्त होता है
जिसके विषय में गीता अध्याय 15 श्लोक 4 में कहा है कि तत्त्वज्ञान तथा #तत्त्वदर्शी संत की
प्राप्ति के पश्चात् परमात्मा के उस परमधाम की खोज करनी चाहिए जहाँ जाने के पश्चात्
साधक फिर लौटकर संसार में कभी नहीं आते। उसी एक परमात्मा की भक्ति करो। मीराबाई
ने कहा कि हे भगवान कृष्ण जी! संत जी कह रहे थे कि मैं जन्म-मरण समाप्त कर देता हूँ।
अब मैं क्या करूँ। मुझे तो पूर्ण मोक्ष की चाह है। श्री कृष्ण जी बोले कि मीरा! आप उस संत
की शरण ग्रहण करके अपना कल्याण कराओ। मुझे जितना ज्ञान था, वह बता दिया। मीरा
अगले दिन मंदिर नहीं गई। सीधी संत जी के पास अपनी नौकरानियों के साथ जाकर दीक्षा
लेने की इच्छा व्यक्त की तथा श्री कृष्ण जी से हुई वार्ता भी संत कबीर जी से साझा की।
मीरा बाई जी ने फिर कबीर परमात्मा द्वारा बताई भगति विधि अपनाई
देर ना कीजिए
वर्तमान में सभी शास्त्रों के अनुसार साधना संत रामपाल जी महाराज दे रहे हैं
अपना कल्याण करवा लीजिए
Gyan Ganga book पढ़िए और
साधना Tv 7 :30 pm से सत्संग भी सुनिए
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