Wednesday, May 20, 2020

Committed to the all-round development of man, jeene ki raah.

मनुष्य एक सामाजिक प्राणी है।
 समाज में रहते हुए उसे सभ्यता के उच्चतम सोपान तक पहुंचना  ही एकमात्र उद्देश्य है।
वर्तमान समय में मनुष्य सामाजिकता की अवनति की ओर अग्रसर हो रहा है इस भयंकर कलयुग में मनुष्य अपने मूल उद्देश्य को भूल चुका है।
 वर्तमान समय में परम संत सतगुरु रामपाल जी महाराज विश्व को अपनी पवित्र विचारधारा अनुसार सभ्यता के सोपान की ओर अग्रसर कर रहे हैं।
 संत सतगुरु रामपाल जी द्वारा लिखित पुस्तक जीने की राह बहुत ही अनमोल है।
 इसके अंदर मनुष्य के मूल उद्देश्य तथा हमारे मानव जाति के प्रति कर्तव्य के प्रति सचेत किया गया है।
 मानव मात्र को यह अनमोल पुस्तक अवश्य पढ़नी चाहिए ।

Thursday, May 14, 2020

Satguru Rampal Ji Maharaj's efforts to improve the current education system

वर्तमान शिक्षा पद्धति में मनुष्य को एक ही उद्देश्य प्रदान कर रखा है ।
वह है किसी भी तरह से येन केन प्रकारेण पैसा कमाना ।
इसके लिए चाहे मुझसे को अपने मानवीय गुणों से इतना ही गिर ना पड़े वह गिर सकता है ।
वास्तव में वर्तमान समय में सामाजिक मूल्यों में जो गिरावट आई है।
 वह हमारे वर्तमान शिक्षा पद्धति में नैतिक शिक्षा की कमी के कारण ही है।
इसी नैतिकता की कमी के कारण मनुष्य आज आधुनिकता की दौड़ में इतना अंधा हो चुका है कि वह अच्छे और बुरे की पहचान भी नहीं कर पा रहा यहां तक कि इसी रुपए की अंधी दौड़ में वह परिवारिक रिश्तो तक को भी ताक पर रख देता है इसी के परिणाम स्वरूप आज समाज के अंदर परिवारिक विघटन हो रहा है परिवार टूट रहे यही परिवार जो पहले एक दूसरे की मदद को आगे आया करता था आज के परिपेक्ष्य में परिवार एक-दूसरे से अलग हो रहे हैं एकल परिवार होना अब आम बात हो चुकी है  
इन्हीं सब दुष्परिणामों के विपरीत एक परम संत जगतगुरु तत्वदर्शी संत रामपाल जी महाराज जी अपने पवित्र वचनों और दिशानिर्देशों द्वारा समाज को एक नई जान फूंकने जा रहे हैं।
संत रामपाल जी महाराज जी के वचनों में वह पावर है ।जो विघटित समाज को भी संगठित कर रही है ।
आज हम देखते हैं बहुत से परिवार जो आधुनिकता की चकाचौंध में अंधे हो रहे थे।
 वह सभी संत रामपाल जी महाराज जी के सानिध्य में एक दूसरे के पूरक बन रहे हैं ।
संत रामपाल जी महाराज जी ने नैतिक शिक्षा और व्यवहारिकता को नए सिरे से परिभाषित किया है ।
उन्होंने अनेकों पुस्तकों की रचना की जो भटक चुके समाज को एक नई दिशा प्रदान कर रही है।
 उनकी एक पवित्र पुस्तक "जीने की राह" जिसने समाज को सभ्यता की एक नई ऊंचाइयों तक ले जाने की नई राह प्रदान की है।
 इस पुस्तक की जितनी मुक्त कंठ से प्रशंसा की जाए उतनी कम है ।
वर्तमान के लोग इसको बहुत ही रुचि से पढ़ रहे हैं।
 आज संत रामपाल जी महाराज जी का उद्देश्य समाज में नशा ,दहेज प्रथा, कन्या भ्रूण हत्या जैसी अनेकों अनेक बुराइयों को खत्म करके समाज को नई चेतना प्रदान करना है ।
इस तरह के महापुरुषों का भारतवर्ष में आगमन बड़ा ही शुभ संकेत दे रहा है।
 इसके लिए जिज्ञासु प्रवृत्ति के मनुष्य को चाहिए कि जीने की राह पुस्तक अवश्य पढ़ें ।
भारत के सुप्रसिद्ध आध्यात्मिक चैनल "साधना" पर रात्रि 7:30 से 8:30 तक प्रसारित होने वाले संत रामपाल जी महाराज जी के मंगल प्रवचन ओं को अवश्य सुनना चाहिए ।
अधिक जानकारी के लिए आप हमारी वेबसाइट पर भी विजिट कर सकते हैं।
www.jagatgururampalji.org

Friday, May 8, 2020

मांसाहार का त्याग करें

कबीर, तिलभर मछली खायके, कोटि गऊ दे दान। काशी करौंत ले मरे, तो भी नरक निदान।।
तिल के समान भी मछली खाने वाले चाहे करोड़ो गाय दान कर लें, चाहे काशी कारोंत में सिर कटा ले वे नरक में अवश्य जाएंगे

🔅 आज़ का मानव समाज मांस खाकर महापाप का भागी बन रहा है।
🔅कभी सोचा है कि, अगर मांस खाने से परमात्मा प्राप्ति होती, तो सबसे पहले मांसाहारी जानवरों को होती, जो केवल मांस ही खाते हैं।
मांस खाकर आप परमात्मा के बनाएं विधान को तोड़कर परमात्मा के दोषी बन रहे हो। ऐसा करने वाले को नरक में डाला जाता है।

Thursday, May 7, 2020

#Allah_Not_Allowed_EatMeat मांसाहार अल्लाह का हुक्म नहीं

कभी सोचा है कि, अगर मांस खाने से परमात्मा प्राप्ति होती, तो सबसे पहले मांसाहारी जानवरों को होती, जो केवल मांस ही खाते हैं।
मांस खाकर आप परमात्मा के बनाएं विधान को तोड़कर परमात्मा के दोषी बन रहे हो। ऐसा करने वाले को नरक में डाला जाता है।

विश्व विजेता भारत


प्राचीन काल से ही संत महात्माओं की धरती कहें जाने वाले हिंदुस्तान में विकट परिस्थितियों में भी आस्था हमेशा भारी रही है, धार्मिकता और विविधता से भरे देश में आज समस्त मानव समाज दयनीय हालात में कोरोना वायरस के कारण एक तरह से  घर की जेल में कैद हैं, अपनी मर्जी से कहीं भी आवागमन नहीं कर सकते हैं, "मौत के भय में बचाव की आश "लिए दुनिया भर में गहरे संकट के बादल इस कदर मंडरा चुके हैं, जिससे
आज दया और करुणा के अभाव में खुद देश दुनिया की हालत दयनीय हो गई है, 
कबीर साहेब जी कहते हैं, 

"दया धर्म का मूल है,पाप मूल अभिमान,कह कबीर दयावान के पास रहे भगवान"

हिन्दू मुस्लिम सिक्ख ईसाई व अन्य सभी धर्मों के मिले जुले संस्कार के लोगों से भरे वतन में इंसानियत कुट कुट कर भरी हुई है, 
आज संकट के दौर में भी देश भर में लोग एकजुटता के साथ एक दूसरे की मदद के लिए तैयार है , कयोकि मानवता का ध्येय हमेशा से परंपरा रही है, 
क्योंकि यंहा भगवान का डर हमेशा से रहा है, तभी समय समय पर परमात्मा के वंश संत रुप में जनता का मार्गदर्शन करने आते रहे हैं, आस्था के प्रतीक भारत को युं ही "सोने की चिड़िया" नही कहा जाता,सदैव प्रत्येक कार्य में भगवान की आस्था रखने वाले देश में आज दु:ख आया है, तो उसके पीछे भी बहुत बडा कारण है
यूँ तो हम कहने को आजाद भारत में रहते हैं, मगर खुली हवा में सांस लिये हुए कई अरसे बीत जाने के बाद इस उधेड़बुन में थे कि कब आऐगा वो दिन जब सूकुन के पल जिऐंगे, आखिर वो दिन आ ही गया, जिसके इंतजार में कई दशकों से हम बैचेन थे, खुली हवा का झौंका कोरोना के डर से मिला, पर मिला जरूर चाहे वो दहशत के गहरे साये की बंद कोठरी में लाॅकडाउन के रुप में मिला, बहरहाल इसके आने से बहुत परिवर्तन हुआ है, समय ठहर सा गया है, वातावरण भी थोड़ा शुद्ध हुआ है, जिससे वायुमंडल में प्रदुषण का सफाया सा हो गया है, जो जीवन में रहने के लिए उम्मीद बढाने वाला है, कशमकश और भागदौड़ भरी जिंदगी जैसे ठहर सी गयी है, पर कहीं ना कहीं कहना होगा कि अचानक हुए इस प्रगतिशील परिवर्तन में अनगिनत जीवों को लंबा जीवन जीने की उम्मीद बंधी है, जिससे आने वाले समय में काफी सुधार होगा, अभी तो चंहु और खामोशी है जिससे यातायात और अन्य गतिविधियों के थम जाने से आम आदमी के जीवन में चमत्कारी बदलाव देखने को मिल रहा है, जिसकी शायद किसी ने कल्पना भी नहीं की थी, की इस कदर पूरी दुनिया के साथ साथ हिंदूस्तान के लोग भी ठहर सा जाऐंगे, मगर कहते हैं कि, 
"कर्म गति टारया ना टले, होनी होकर रहे", 
ऐसा ही अभी के समय चरितार्थ हो रहा है, प्रकृति का विधान है कि जब जब इसके साथ खिलवाड़ किया जाता है, तब तब ऐसा भारी बदलाव आता है, जो अपने साथ भयानक मंजर लाता है, जिसमें असंख्य जीवों को अपने प्राणों की आहुति देनी पड़ती है, वर्तमान के समय में भी काल ऐसा ही कर रहा है,सत्युग, त्रेता, द्वापर से लेकर इस कलियुग के समय तक शास्त्रविरुद्ध साधना काल के द्वारा बढती चली गई, जिस कारण से मनुष्यों में कष्ट दर कष्ट आते गऐ, हमने कभी भी शास्त्रों को ठिक ढंग ना पहचान कर अन्य साधना करते रहे, और अधिकतर चीन जैसे देश तो नास्तिक हो गऐ, और संतों की बात ना मानकर
हम कभी अपने शास्त्र नही खंगोलते की उसमें क्या राज छुपा हुआ है, बस आलस्य के कारण सोचते हैं कि किसने देखा क्या होगा, मगर अब पुरी दुनिया देख रही है कि हम किस कदर भयभीत होकर अपने प्राणों की रक्षार्थ घरो में सिमटे हुए हैं, कोरोना वायरस के कारण जो मौत का भय संसार के प्रत्येक इंसान को सता रहा है, वो उसकी नादानी और हठ के कारण है, क्योंकि हमने भगवान के विधान को नकारा है, और अपनी चतुरता के कारण हर युग में मात खाई है, 
कबीर साहेब जी कहते हैं

"चारो युग में मेरे संत पुकारे,कुक कहा हम हैल रै,हीरे मानिक मोती बरसैं,ये जग चुगता ढैल रै,"

 यानि कहने का भावार्थ है कि, जब भी धरती पर भगवान का आगमन पुर्ण संत रुप में हुआ है , तब उन्होंने अपनी अमृतवाणी के द्वारा संसार में रहकर आम जन को चेतावनी दी की भगवान को मत भूलो, मगर हर युग में ऐसा ही हुआ की किसी ने भी माना नही, एक महान परिवर्तन का शंखनाद हुआ था जब हरियाणा के हिसार जिले के बरवाला कांड हुआ था, एक महान तत्वदर्शी संत ने क्रांतिकारी तरीके से अध्यात्मिक उन्नति का अविष्कार कर दिया था, मगर उस समय किसी ने माना नही, हमेशा से सुनते आ रहे थे कि महान परिवर्तन होगा, मगर अब उस महान परिवर्तन की आहट भी हो चुकी है, और देख भी रहे हैं, पिछले सो वर्ष के इतिहास की अगर बात करे तो क्या कभी किसी ने रेल, बस, ट्रेफिक, फेक्ट्रीया, बाजार इतने लंबे और अनिश्चित कालीन के लिए कभी भी बंद होते सुने या देखे नही, लेकिन इस वक्त पूरी दुनिया देख रही है कि किस कदर आमजन पर जो महामारी आई है, उससे उबर पाना इंसान के बस की बात नहीं है, फिर एक बार भगवान के बारे में सोचना होगा कि कहीं ना कहीं भारी गलती हुई है, जो इतनी बड़ी विपदा संसार में एक साथ कहर बनकर आई है, भगवान के संतों को सताने का एक बडा कारण है, आज भारत देश में विडम्बना है कि न्याय की उम्मीद में कुछ असामाजिक लोगों द्वारा मानवता का ह्रास कर दिया गया है, मगर पुनः पुर्ण ब्रह्म अपने विधान अनुसार जब भी धरती पर अधर्म बढता है तो वे आते है, या अपने संत को भेजकर धर्म की रक्षार्थ स्थिति को सामान्य करते हैं,मगर उन महान तत्वदर्शी संत के साथ भी अन्याय किया जा रहा है, आज भारत देश की बागडोर जिनके हाथ में है, उन्हें उन पुर्ण तत्वदर्शी संत रामपाल जी महाराज से एक बार अवश्य मिलना चाहिए जो श्रीमद्भागवत गीता, वेदों के सारांश और कबीर साहेब जी की अमृतवाणी को आधार मानकर समस्त मानव समाज का कल्याण और उत्थान कर रहे हैं,जरुरत है नजर अंदाज ना करके उन्हें समझने की,भारत देश की अखंडता और विविधता को कायम रखना बेहद जरुरी है,और ये तभी संभव है जब पुर्ण संत के सानिध्य में रहेंगे ,प्रजा की हिफाजत करना राजा का कर्तव्य बनता है ,आज इस भयानक बनती जा रही स्थिति से जल्द निपटा जा सके,इसके लिए देश दुनिया को पुर्ण परमात्मा के ज्ञान और समाधान के साथ शरणागत होने की विशेष आवश्यकता है!

Wednesday, May 6, 2020


#Who_is_Real_SadGuru
पूर्ण संत समस्त वेदों के ज्ञाता होने के साथ-साथ पूर्ण परमेश्वर की अमृतवाणी भी बताते हैं साथ ही समस्त बुराइयों से छुटकारा दिलाकर अमर पद (सतलोक) की प्राप्ति करवाते हैं जहां जाने के बाद साधक फिर लौट कर संसार में नहीं आते गीता अध्याय 18 श्लोक 62 के अनुसार पूर्ण मुक्ति मिलती है
अधिक जानकारी के लिए हमारी वेबसाइट पर विजिट करें
Jagatgururampalji.org

#Say_No_To_Alcohol नशे की आदत बुराइयों का घर है।



शराब एक ऐसी खतरनाक बुराई है जो बसे बसाए खुशहाल परिवार को भी उजाड़ देती है, तथा धन व बल दोनों का नाश करती है।
एक तरफ ठेके खुलवा दिए, और दूसरी तरफ दारू पीके हो हल्ला करने वाले को जेल।
अब दारू पीके वो क्या रामायण बाचेगा
- संत रामपाल जी