Thursday, May 7, 2020

विश्व विजेता भारत


प्राचीन काल से ही संत महात्माओं की धरती कहें जाने वाले हिंदुस्तान में विकट परिस्थितियों में भी आस्था हमेशा भारी रही है, धार्मिकता और विविधता से भरे देश में आज समस्त मानव समाज दयनीय हालात में कोरोना वायरस के कारण एक तरह से  घर की जेल में कैद हैं, अपनी मर्जी से कहीं भी आवागमन नहीं कर सकते हैं, "मौत के भय में बचाव की आश "लिए दुनिया भर में गहरे संकट के बादल इस कदर मंडरा चुके हैं, जिससे
आज दया और करुणा के अभाव में खुद देश दुनिया की हालत दयनीय हो गई है, 
कबीर साहेब जी कहते हैं, 

"दया धर्म का मूल है,पाप मूल अभिमान,कह कबीर दयावान के पास रहे भगवान"

हिन्दू मुस्लिम सिक्ख ईसाई व अन्य सभी धर्मों के मिले जुले संस्कार के लोगों से भरे वतन में इंसानियत कुट कुट कर भरी हुई है, 
आज संकट के दौर में भी देश भर में लोग एकजुटता के साथ एक दूसरे की मदद के लिए तैयार है , कयोकि मानवता का ध्येय हमेशा से परंपरा रही है, 
क्योंकि यंहा भगवान का डर हमेशा से रहा है, तभी समय समय पर परमात्मा के वंश संत रुप में जनता का मार्गदर्शन करने आते रहे हैं, आस्था के प्रतीक भारत को युं ही "सोने की चिड़िया" नही कहा जाता,सदैव प्रत्येक कार्य में भगवान की आस्था रखने वाले देश में आज दु:ख आया है, तो उसके पीछे भी बहुत बडा कारण है
यूँ तो हम कहने को आजाद भारत में रहते हैं, मगर खुली हवा में सांस लिये हुए कई अरसे बीत जाने के बाद इस उधेड़बुन में थे कि कब आऐगा वो दिन जब सूकुन के पल जिऐंगे, आखिर वो दिन आ ही गया, जिसके इंतजार में कई दशकों से हम बैचेन थे, खुली हवा का झौंका कोरोना के डर से मिला, पर मिला जरूर चाहे वो दहशत के गहरे साये की बंद कोठरी में लाॅकडाउन के रुप में मिला, बहरहाल इसके आने से बहुत परिवर्तन हुआ है, समय ठहर सा गया है, वातावरण भी थोड़ा शुद्ध हुआ है, जिससे वायुमंडल में प्रदुषण का सफाया सा हो गया है, जो जीवन में रहने के लिए उम्मीद बढाने वाला है, कशमकश और भागदौड़ भरी जिंदगी जैसे ठहर सी गयी है, पर कहीं ना कहीं कहना होगा कि अचानक हुए इस प्रगतिशील परिवर्तन में अनगिनत जीवों को लंबा जीवन जीने की उम्मीद बंधी है, जिससे आने वाले समय में काफी सुधार होगा, अभी तो चंहु और खामोशी है जिससे यातायात और अन्य गतिविधियों के थम जाने से आम आदमी के जीवन में चमत्कारी बदलाव देखने को मिल रहा है, जिसकी शायद किसी ने कल्पना भी नहीं की थी, की इस कदर पूरी दुनिया के साथ साथ हिंदूस्तान के लोग भी ठहर सा जाऐंगे, मगर कहते हैं कि, 
"कर्म गति टारया ना टले, होनी होकर रहे", 
ऐसा ही अभी के समय चरितार्थ हो रहा है, प्रकृति का विधान है कि जब जब इसके साथ खिलवाड़ किया जाता है, तब तब ऐसा भारी बदलाव आता है, जो अपने साथ भयानक मंजर लाता है, जिसमें असंख्य जीवों को अपने प्राणों की आहुति देनी पड़ती है, वर्तमान के समय में भी काल ऐसा ही कर रहा है,सत्युग, त्रेता, द्वापर से लेकर इस कलियुग के समय तक शास्त्रविरुद्ध साधना काल के द्वारा बढती चली गई, जिस कारण से मनुष्यों में कष्ट दर कष्ट आते गऐ, हमने कभी भी शास्त्रों को ठिक ढंग ना पहचान कर अन्य साधना करते रहे, और अधिकतर चीन जैसे देश तो नास्तिक हो गऐ, और संतों की बात ना मानकर
हम कभी अपने शास्त्र नही खंगोलते की उसमें क्या राज छुपा हुआ है, बस आलस्य के कारण सोचते हैं कि किसने देखा क्या होगा, मगर अब पुरी दुनिया देख रही है कि हम किस कदर भयभीत होकर अपने प्राणों की रक्षार्थ घरो में सिमटे हुए हैं, कोरोना वायरस के कारण जो मौत का भय संसार के प्रत्येक इंसान को सता रहा है, वो उसकी नादानी और हठ के कारण है, क्योंकि हमने भगवान के विधान को नकारा है, और अपनी चतुरता के कारण हर युग में मात खाई है, 
कबीर साहेब जी कहते हैं

"चारो युग में मेरे संत पुकारे,कुक कहा हम हैल रै,हीरे मानिक मोती बरसैं,ये जग चुगता ढैल रै,"

 यानि कहने का भावार्थ है कि, जब भी धरती पर भगवान का आगमन पुर्ण संत रुप में हुआ है , तब उन्होंने अपनी अमृतवाणी के द्वारा संसार में रहकर आम जन को चेतावनी दी की भगवान को मत भूलो, मगर हर युग में ऐसा ही हुआ की किसी ने भी माना नही, एक महान परिवर्तन का शंखनाद हुआ था जब हरियाणा के हिसार जिले के बरवाला कांड हुआ था, एक महान तत्वदर्शी संत ने क्रांतिकारी तरीके से अध्यात्मिक उन्नति का अविष्कार कर दिया था, मगर उस समय किसी ने माना नही, हमेशा से सुनते आ रहे थे कि महान परिवर्तन होगा, मगर अब उस महान परिवर्तन की आहट भी हो चुकी है, और देख भी रहे हैं, पिछले सो वर्ष के इतिहास की अगर बात करे तो क्या कभी किसी ने रेल, बस, ट्रेफिक, फेक्ट्रीया, बाजार इतने लंबे और अनिश्चित कालीन के लिए कभी भी बंद होते सुने या देखे नही, लेकिन इस वक्त पूरी दुनिया देख रही है कि किस कदर आमजन पर जो महामारी आई है, उससे उबर पाना इंसान के बस की बात नहीं है, फिर एक बार भगवान के बारे में सोचना होगा कि कहीं ना कहीं भारी गलती हुई है, जो इतनी बड़ी विपदा संसार में एक साथ कहर बनकर आई है, भगवान के संतों को सताने का एक बडा कारण है, आज भारत देश में विडम्बना है कि न्याय की उम्मीद में कुछ असामाजिक लोगों द्वारा मानवता का ह्रास कर दिया गया है, मगर पुनः पुर्ण ब्रह्म अपने विधान अनुसार जब भी धरती पर अधर्म बढता है तो वे आते है, या अपने संत को भेजकर धर्म की रक्षार्थ स्थिति को सामान्य करते हैं,मगर उन महान तत्वदर्शी संत के साथ भी अन्याय किया जा रहा है, आज भारत देश की बागडोर जिनके हाथ में है, उन्हें उन पुर्ण तत्वदर्शी संत रामपाल जी महाराज से एक बार अवश्य मिलना चाहिए जो श्रीमद्भागवत गीता, वेदों के सारांश और कबीर साहेब जी की अमृतवाणी को आधार मानकर समस्त मानव समाज का कल्याण और उत्थान कर रहे हैं,जरुरत है नजर अंदाज ना करके उन्हें समझने की,भारत देश की अखंडता और विविधता को कायम रखना बेहद जरुरी है,और ये तभी संभव है जब पुर्ण संत के सानिध्य में रहेंगे ,प्रजा की हिफाजत करना राजा का कर्तव्य बनता है ,आज इस भयानक बनती जा रही स्थिति से जल्द निपटा जा सके,इसके लिए देश दुनिया को पुर्ण परमात्मा के ज्ञान और समाधान के साथ शरणागत होने की विशेष आवश्यकता है!

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